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March, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

देखो आयो रे बजरंगबली

बधाइयाँ जी बधाइयाँ
घर में लाला भयो है

आप सोच रहे होंगे मै किसके जन्मदिन की बात कर रहा हूँ
थोडा दिमाग लगाइए 
नहीं याद आया 
अजी अपने हनुमान लला का जन्मदिन है आज
चलिए आज श्री हनुमान जी के जन्मदिन पर उनके बचपन की एक खूबसूरत कहानी सुनाता हूँ


भगवान शिव के अंश और पवन देव के वेग से युक्त होने के कारन श्री हनुमंत लाल बचपन से ही अत्यंत बलशाली थे और बन्दर जाती में उत्पन्न होने के कारण स्वाभाविक चंचलता भी थी उनमे अतः वो प्रायः बालसुलभ क्रीडाएं करते रहते थे जिससे कभी कभी बड़ी समस्याएं भी पैदा हो जाया करती थीं
श्री बाल  हनुमान प्रायः ऋषियों के आश्रम में जाया करते थे और कभी उनके वस्त्र तो कभी घर की  अन्य वस्तुएं  उठा कर आकाश में जोर से उछाल  दिया करते थे.... जो चीज एक बार हवा में चली जाती थी वो वापस लौट कर धरती पर नहीं आती थी 
कभी कभी तो वो ऋषियों की कुटिया को ही एक जगह से उठा कर दूसरी जगह पर रख दिया करते थे
एक बार एक ऋषि एक बड़े वट वृक्ष के नीचे तप कर रहे थे जब बाल हनुमान ने पूरे वृक्ष को पर्वत के बड़े भाग सहित उखाड़  लिया और हवा में उड़ चले
काफी ऊंचाई पर पहुच जाने पर हवा के वेग के कारन मुनि का ध्यान भंग हो ग…

श्री राम के देश में राम के जन्मस्थान पर राजनीति

आज कल श्री राम जन्मभूमि मुद्दा फिरसे छिड़ गया है
कोर्ट में बयानबाजी से लेकर चौराहों और गलियों में भी लोग जहाँ तहां खड़े होकर अपने अपने मंतब्य दे रहे हैं
कुछ की नजर में मंदिर का निर्माण होना चाहिए तो कुछ का अपना अलग ही राग है कि जिस मंदिर के बनाने से लाखो लोग आपस में लड़ जाएँ ऐसा  मंदिर ना ही बने तो ठीक है...
कुछ का तो यहाँ तक कहना है कि वहां पर फिर से बाबरी मस्जिद का निर्माण करा देना चाहिए
और कुछ इसका निदान करते हैं कि मंदिर तो बने साथ ही बगल में मस्जिद का निर्माण हो जाए
पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष  माननीय श्री गडकरी महोदय ने भी इसी बात का ऐलान किया था


मै इस सन्दर्भ में जो भी कहने जा रहा हूँ उसे भले ही आप मेरी सांप्रदायिक भावना कहें या कट्टरवादिता पर
जरा सोचिये भगवान राम जो भारतीयों के प्राण हैं, उन्ही की जन्मभूमि पर उन्ही के जन्मस्थान पर उनका मंदिर नहीं बन पा रहा
ये तो वही बात हो गई कि कोई आप को आपकी ही जमीन से बेदखल कर दे

दूसरी बात - बाबर एक आक्रमणकारी  था जो भारत का भला करने के इरादे से तो नहीं ही आया था ये तो हम सभी को पता है
हमारा इतिहास उसे उन आक्रान्ताओं में गिनता है जिन्होंने …

राम जनम भयो आज , बधाई घर घर बाजे

ये अपार जनसैलाब इकठ्ठा हुआ  है भगवान श्री राम के जन्मदिन पर स्नान हेतु सरयू नदी के तट पर स्थित  महर्षि सृंगी ऋषि के आश्रम पर ...
हम पहले ही बता चुके हैं कि ये पुण्य स्थान अयोध्या का अंतिम छोर है
यहाँ सरयू माँ कि पवित्र धरा में स्नान करके लोग अपने पापों से मुक्ति पाते हैं
इस स्थान पर आज भी जल अति सुरक्षित और स्वच्छ  है
मै अपने आप को सौभाग्यशाली समझता हूँ कि मै इस पुण्य धाम के अति निकट का निवासी हूँ
मै इस धाम कि महिमा का गायन इस लिए भी करता हूँ कि जितना पवित्र ये स्थान है उतना ही रम्य यहाँ का वातावरण भी है
ये धाम अति सिद्ध भी है जिसका अनुभव मैंने स्वयं किया है


भगवान् श्री राम के जन्मस्थान को तो प्रायः सभी जानते हैं पर उनके जन्म के मुख्या कारण स्वरुप महर्षि श्री सृन्गीरिशी के स्थान को तो क्या वरन स्वयं महर्षि तक को कोई नहि जानता
इस लेख के द्वारा मै आप सब को रामायण के सबसे प्रमुख पात्र का परिचय करा रहा हूँ


आप लोगों से अपील है, अगर कभी भी अयोध्या दर्शन के लिए आयें तो इस पवित्र स्थान का भी दर्शन जरूर करियेगा
अगर रास्ते कि जानकारी चाहिए हो तो टिप्पड़ी में लिखियेगा
अब आपको कुछ और फोटोस दिखता हूँ


वाद्य …

भारत रक्षक

आजादी की लड़ाई के  महानायक जिन्होंने राष्ट्र की सोती हुई आत्मा को जगाने मात्र के लिए अपने प्राणों को आहुत कर दिया उन पूज्यनीय देशभक्त श्री भगत सिंह जी, राजगुरु जी और सुखदेव जी के बलिदान दिवस के अवसर पर मै अपने आसुओं के दो फूल अर्पित करता हूँ..
आज जाने क्यूँ मन करता है की काश हम इतने कृतज्ञ होते कि उनके बलिदान का महत्व  समझते
आज जिस तरह से लोग उनके बलिदानों पर भी राजनीति कर लेते हैं , डर लगता है की भारत कहीं फिर गुलाम ना हो जाये
और अगर ऐसा हुआ तो इस बार फिर कोई भगत सिंह बलिदान देने सामने नहीं आएगा

प्रिय भारतवासी मित्रों
निकलो संकीर्ण मानसिकता के दलदल से
हमें एकजुट होने की जरूरत है
ऐसा ना हो की हम तब जागें जब काल के दांत हमें चबा जाने को उद्यत हों

उपनिषद कहते हैं - उत्तिष्ठत  जाग्रत , प्राप्य वरान्निबोधत
वन्दे मातरम

OUR NATIONAL FLAG

प्रत्‍येक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र का अपना एक ध्‍वज होता है। यह एक स्‍वतंत्र देश होने का संकेत है। भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज की अभिकल्‍पना पिंगली वैंकैयानन्‍द ने की थी और इसे इसके वर्तमान स्‍वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था, जो 15 अगस्‍त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्‍वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व की गई थी। इसे 15 अगस्‍त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया गया और इसके पश्‍चात भारतीय गणतंत्र ने इसे अपनाया। भारत में ''तिरंगे'' का अर्थ भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज है। भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज में तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां हैं, सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद ओर नीचे गहरे हरे रंग की प‍ट्टी और ये तीनों समानुपात में हैं। ध्‍वज की चौड़ाई का अनुपात इसकी लंबाई के साथ 2 और 3 का है। सफेद पट्टी के मध्‍य में गहरे नीले रंग का एक चक्र है। यह चक्र अशोक की राजधानी के सारनाथ के शेर के स्‍तंभ पर बना हुआ है। इसका व्‍यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है और इसमें 24 तीलियां है।तिरंगे का विकास यह …

KNOW OUR INDIA

Interesting Facts about IndiaIndia never invaded any country in her last 100000 years of history. When many cultures were only nomadic forest dwellers over 5000 years ago, Indians established Harappan culture in Sindhu Valley (Indus Valley Civilization) The name 'India' is derived from the River Indus, the valleys around which were the home of the early settlers. The Aryan worshippers referred to the river Indus as the Sindhu. The Persian invaders converted it into Hindu. The name 'Hindustan' combines Sindhu and Hindu and thus refers to the land of the Hindus. Chess was invented in India. Algebra, Trigonometry and Calculus are studies, which originated in India. The 'Place Value System…

KNOW OUR INDIA

भारत के बारे में रोचक तथ्‍यभारत के इतिहास के अनुसार, आखिरी 100000 वर्षों में किसी भी देश पर हमला नहीं किया है।जब कई संस्कृतियों 5000 साल पहले ही घुमंतू वनवासी थे, भारतीय सिंधु घाटी (सिंधु घाटी सभ्यता) में हड़प्पा संस्कृति की स्थापना की।भारत का अंग्रेजी में नाम 'इंडिया' इं‍डस नदी से बना है, जिसके आस पास की घाटी में आरंभिक सभ्‍यताएं निवास करती थी। आर्य पूजकों में इस इंडस नदी को सिंधु कहा।पर्शिया के आक्रमकारियों ने इसे हिन्‍दु में बदल दिया। नाम 'हिन्‍दुस्‍तान' ने सिंधु और हीर का संयोजन है जो हिन्‍दुओं की भूमि दर्शाता है।शतरंज की खोज भारत में की गई थी।बीज गणित, त्रिकोण मिति और कलन का अध्‍ययन भारत में ही आरंभ हुआ था।'स्‍थान मूल्‍य प्रणाली' और 'दशमलव प्रणाली' का विकास भारत में 100 बी सी में हुआ था।विश्‍व का प्रथम ग्रेनाइट मंदिर तमिलनाडु के तंजौर में बृहदेश्‍वर मंदिर है। इस मंदिर के शिखर ग्रेनाइट के 80 टन के टुकड़े से बनें हैं यह भव्‍य मंदिर राजा राज चोल के राज्‍य के दौरान केवल 5 वर्ष की अवधि में (1004 ए डी और 1009 ए डी के दौरान) निर्मित किया गया था।भारत विश्‍…

SRI SRINGIRISHI DHAM

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SANSKRIT BHARTI-KALJAYI SANSTHA

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KAISA DURBHAGYA

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MAHANTAM SACHIN

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ANAND

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pracheen bhartiya siksha paddhhati

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