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October, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तुहुका हेरेव चारिव वारी नाय भेटान्‍या रसिया ।।

तुहका हेरेव चारिव वारी नाय भेटान्‍या रसिया
मास अषाढ अयोध्‍या नगरी हेरेव चारिव वारी
सावन मास सहारन पूर मा एक दिन धावा मारी
भादव मास रैन अधियारी नाय भेटान्‍या रसिया ।।

क्‍वार मास काशी मा हेरेव कातिक दिया जलाई
अगहन मास रात दिन खोजेन नाही परै देखाई
पुसवा पूना कै तैयारी नाय भेटान्‍या रसिया ।।

माघ मास मदरास में गइले जाडा बहुत सताई
फागुन फरूक्‍खाबाद में आये रहि रहि जिया घबडाई
चैत मा चन्‍डीगढ सिधारी नाय भेटान्‍या रसिया ।।

लाग मास वैशाख त सीधै बम्‍बई नगर सिधारी
कीन्ह तैयारी जेठ के तपतै जिला जौनपुर जारी
भरि भरि बहै नयन से वारी नाय भेटान्‍या रसिया ।।

बारह मास खोज भगवन का हमतौ गइलेन हारी
फैजाबाद से होइकै लौटेन डिहवा गाँव मझारी
अपने मन मन्दिर माँ खोजेन तबै भेटान्‍या रसिया ।।


ये कहरवा गीत वर्तमान अम्बेडकर नगर के डिहवा गाँव के निवासी स्‍व. श्री नन्‍दकिशोर जी द्वारा रचित है ।

वो जो प्‍यार की बातें बघारा करते हैं

वो जो कि प्‍यार की बातें बघारा करते हैं वही दुर्दिन पडे पहले किनारा करते हैं ।।
हमने अक्‍सर है देखी आदतें हसीनों की मुस्‍कुरा कर दिले दावत-नकारा करते हैं ।।
वो हमको खास दुश्‍मन की अदा फरमाते हैं
मगर फिर भी मेरे दिल में गुजारा करते हैं ।।

ये नामाकूल दुनिया समझे क्‍या जजबात मेरे जो सिर पे बैठकर के लात मारा करते हैं ।।
चले अब छोड के 'आनन्‍द' ये आबाद शहर के वीराने हमें अब भी पुकारा करते हैं ।।
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चुप सी तनहाइयों में मत जाओ, नहीं तो मेरी याद आयेगी ।।

मेरी ये रचना उन सभी के दिलों को हिलाकर रख देगी जिन्‍होने कभी किसी से प्‍यार किया होगा और ये मेरा दावा है दोस्‍तों ।। क्‍यूँकि इसे मैंने अपने पूरे दिल से लिखा था । ज्‍यादा कुछ कहने से अच्‍छा आप खुद ही पढकर देख लीजिये ।।
चुप सी तनहाइयों में मत जाओ, नहीं तो मेरी याद आयेगी ।।अपनी आँखों में आँसू मत लाओ, नहीं तो मेरी याद आयेगी ।।
वो खुशनसीब दिन जो साथ में बिताये थे और मैने तुम्‍हारे लिये  जो भी गाये थे गीत वो प्‍यार वाले मत गाओ, नहीं तो मेरी याद आयेगी ।।
कभी मन में मेरी यादों के कमल खिल जायें न चाहकर भी गर ये सुर्ख होंठ सिल जायें न रहो गम में और न इतराओ, नहीं तो मेरी याद आयेगी ।।
तुम्‍हारे नयन जब बेचैन हो पुकार उठे लाख कोशिश पे भी गर मन में मेरा प्‍यार उठे थाम कर दिल जरा सा मुसकाओ, नहीं तो मेरी याद आयेगी ।।

अब टिप्‍पणिया दीजिये ।।

मशहूर आल्‍हा गायक श्री राम किशोर जी के द्वारा एक कहरवा गीत ।।

ये वीडियो पूर्वी उत्‍तरप्रदेश के मशहूर आल्‍हा गायक श्री रामकिशोर वर्मा जी का है ।
जो इस समय प्राय: बीमार ही रहते हैं ।
अभी हाल ही में वो हमारे घर आये हुए थे , उस समय भी उनका स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍यक नहीं था
किन्‍तु फिर भी सभी ग्रामीणों की इच्‍छा को शिरोधार्य करके उन्‍होने कुछ कहरवा गीत सुनाये ।।
इन्‍ही गीतों में से एक को यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मेरे चलभाष द्वारा रिकार्ड किया गया है ।
रात्रि के समय में गायन के कारण वर्मा जी का बिम्‍ब तो अधिक स्‍पष्‍ट नहीं है किन्‍तु उनकी आवाज ठीक सुनाई दे रही है ।
आल्‍हा गायन के महारथी होने के कारण ही इनकी आवाज की बुलन्‍दी इस कहरवा में चार चाँद लगा देती है ।
गायन के आरम्‍भ में एक मिनेट का वार्तालाप है  ।
गाने के बोल हैं ''मिटि गै बाबर कै निसानी अब कहानी न रही'' ।।

वीडियो में वर्मा जी जमीन पर बैठे हुए हैं, कारण यह है कि हमारे यहाँ पिछले 31 वर्षों से प्रति सप्‍ताहान्‍त रात्रि में संकीर्तन का आयोजन होता है । प्रारम्भिक स्‍तर तो मात्र गाँव के लोगों तक ही सीमित था किन्‍तु समय के साथ साथ लोगों की उपस्थिति भी बढने लगी । जिसके कारण संकी…