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December, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चाहने वालों से तो पत्‍थर भी पिघल रहे हैं ।।- गजल

तुम हो अनजान के हम तुमसे प्‍यार कर रहे हैं मौत क्‍या मारेगी हम जिंदगी से मर रहे हैं।।
बडे अधियाराहैं इस राह में मगर देखो घने अंधेरे में जुगनू हजार जल रहे हैं।।
कोई समझाए ये ‘आनन्‍द’ परेशान क्‍यूँ है अभी तो आशा के दिये से किरण निकल रहे हैं ।।
वो तो नाजुक हैं दिल के मान जाएंगे इक दिन चाहने वालों से तो पत्‍थर भी पिघल रहे हैं।।

हे अतुलित बलधारी हो सुधि लीजै हमारी ।। प्रसिद्ध अवधी भजन - डाउनलोड करें ।।

यहॉं से डाउनलोड करें/सुनें-HE ATULIT BALDHARI mp3


फैजाबाद जिले के ग्रामीण (गोशाईगंज) क्षेत्र के पास रहने वाले श्री दयाराम तिवारी जी 'पुष्प' कृत
ये हनुमत् स्‍तुति आप सभी के समक्ष प्रस्‍तुत कर रहा हूँ ।।
मुख्‍य स्‍वर श्री कवि अनिरूद्धमुनि पाण्‍डेय ' आर्त' का है ।

फैजाबाद के ग्रामीण क्षेत्र में सुना जाना वाला प्रसिद्ध भजन
हे अतुलित बलधारी हो सुधि लीजै हमारी
अवधी व खडी बोली के मिश्रण से गीत सरस है ।

कवि आर्त के स्‍वर ने गीत को और भी मधुर बना दिया है ।
आप अपने प्रति दिन के आराधन में इस गीत को शामिल कर सकते हैं ।।