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जिससे हो देश का उत्थान .....

जिससे हो देश का उत्थान और सनमान
दोनों हाथ जोड़ उसे सिर मैं झुकाता हूँ
राजनीती से नहीं है मेरा कोई सरोकार
कवि हूँ मैं कविता से पहचाना जाता हूँ
कोई दल-बल नहीं आत्मबल से "आनन्द"
अपनी उड़ान आसमान को दिखाता हूँ
पर करे देश का जो अपमान रंच-मात्र
उसके विरुद्ध फिर कलम उठाता हूँ ।।

डॉ. विवेकानन्द पाण्डेय "आनन्द"
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टिप्पणियाँ

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