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संदेश

अबकी बार योगी सरकार ।।

बेशर्मों की लगी कतार । अपना हित भी भूले यार ।
दूर करो घटिया सरकार ।
यू पी में योगी इस बार ।।

आज प्रदेश करे चीत्कार ।
30 साल से हूँ बीमार ।
बसपा सपा हैं सिर पे सवार ।
अब इनको दीजै अपवार ।
यू पी में योगी इस बार ।।

सपा है बाबर की औलाद ।
इसमें सारे हैं जल्लाद ।
हिन्दु विहगहिं हैं सैयाद ।
इनने राज्य किया बर्बाद ।
रोको अब इनका विस्तार ।
अबकी बस योगी सरकार ।।

भूल गए तुम वो प्रतिकार ।
कही थी एक तुच्छ एक बार ।
तिलक तराजू और तलवार ।
इनको मारो जूते चार ।
अब उस भैंस को डालो मार ।
अबकी बस योगी सरकार ।।

पहचानो अपना स्तर ।
हाथ उठालो खड्ग प्रखर ।
काटो हाथी का मस्तक ।
कर डालो साइकिल पंचर ।
खिले कमल हों दूर विकार ।
यू पी में योगी इस बार ।।

आया है स्वर्णिम अवसर ।
इसे गवांना मत प्रियवर ।
आपस का छोडो मतभेद ।
जोड़ो जो हैं गए बिखर ।
यू पी मत बनने दो बिहार ।
अबकी बस योगी सरकार ।।

यह पथ इतना नहीं सरल ।
काँटों पर चलना पैदल ।
कीचड़ फेंकें प्रतिद्वंदी ।
पुष्पित उसमें करो कमल ।
"आनन्द" यही मिले उपहार ।
अबकी बार योगी सरकार ।।
बार-बार योगी सरकार ।। बार-बार योगी सरकार ।।

डॉ. विवेकानन्द पाण्डेय
हाल की पोस्ट

जिससे हो देश का उत्थान .....

जिससे हो देश का उत्थान और सनमान
दोनों हाथ जोड़ उसे सिर मैं झुकाता हूँ
राजनीती से नहीं है मेरा कोई सरोकार
कवि हूँ मैं कविता से पहचाना जाता हूँ
कोई दल-बल नहीं आत्मबल से "आनन्द"
अपनी उड़ान आसमान को दिखाता हूँ
पर करे देश का जो अपमान रंच-मात्र
उसके विरुद्ध फिर कलम उठाता हूँ ।।

डॉ. विवेकानन्द पाण्डेय "आनन्द"
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जनता परिवार के विलय पर

अर्ज़ है --

जनता ने जिनको दिया था कभी अधिकार
वे ही जनता के ठेकेदार बने बैठे हैं ।
जिनसे था डर किस्ती के डूब जाने का
वही किस्ती के पतवार बने बैठे हैं ।
जिसने न छोड़ा भैंस-गाय का चारा "आनन्द"
आज वो हमारे वफादार बने बैठे हैं ।
जितने भी थे डकैत चोर राजनीती में वे
सब आज एक परिवार बने बैठे हैं ।।

डॉ. विवेकानन्द पाण्डेय "आनन्द"
-->

मोदी मोदी मोदी ।।

आतंक और अन्‍याय विवश हमने जब हिम्‍मत खो दी ।
फिर देश महाचीत्‍कार कर उठा, मोदी मोदी मोदी ।।

सन् 47 से हमने सत्‍ता कांगरेस के हाँथ दिया ।
पर भ्रष्‍ट कांगरेसी नेताओं ने जनता को भुला दिया ।
हम आस लगाये बैठ रहे अब-अब ये देश सम्‍हालेंगे ।
क्‍या पता हमें ये धीरे-धीरे भारत माँ को खा लेंगे ।
धर वेश साधु का शतधा देश लूटने आये ढोगी ।।
फिर आर्तनाद कर उठा देश अब मोदी मोदी मोदी ।।

इतिहास बदल डाला गाँधी को राष्‍ट्रपिता कर डाला ।
पर पडी नहीं शेखर, सुभाष के गले एक भी माला ।
हर नोट आज गाँधी है भइया मायाजाल बडा है ।
भारत में महापुरुष वीरों का आज अकाल पडा है ।
हमको आजाद कराने को जिनने निज निजता खो दी ।।
उनके हित देश पुकार उठा है मोदी मोदी मोदी ।।

य‍दि भारत को फिर से दुनिया का गुरू बनाना है ।
यदि वीर शहीदों के हक का सम्‍मान दिलाना है ।
यदि गो, गंगा, गीता की इज्‍जत हमें बचाना है ।
तो सच मानो मोदी को सत्‍ता में पहुँचाना है ।
फिर भाग छुपें आतंकी खुद ही अपनी माँ की गोदी ।।
"आनन्‍द" सरे बाजार कह उठा मोदी मोदी मोदी ।।

अब खुजलीवाल करे खुजली या राहुल रार मचाये ।
हिम्‍मत है तो कश्‍मीर हिन्‍द से अलग करके दिख…

सिंहन कै शासन खतम हुआ अब देश सियार संभालेंगे ।।

यहि राष्‍ट्रधर्म कै बात आज हम हिरिदय माँझ छुपा लेंगे ।
सिंहन कै शासन खतम हुआ अब देश सियार संभालेंगे ।।

इ गठबन्‍धन कै दौर हुवै का फरक कउन जीता हारा
जौ अबकी बहुमत पूर्ण मिला बनवाइब इक बंगला न्‍यारा
जौ जनाधार कमजोर परा दुसरे से हांथ मिला लेंगे ।।
सिंहन कै शासन खतम हुआ अब देश सियार संभालेंगे ।।

ई मूसमार हम बेंचि बेंचि कइसौ मन्‍त्री कै पद पायन
पूरा प्रदेश बा बचा भले हम एक शहर का चरि खायन
हम मोटका मूसर हई दवाई कउनो दिहौ पचा लेंगे ।।
सिंहन कै शासन खतम हुआ अब देश सियार संभालेंगे ।।

ई राष्‍ट्रगान और राष्‍ट्रगीत हिन्‍दुस्‍तानिन कै टोटा है
इस्‍लाम अहै सबसे महान ई राष्‍ट्रधर्म तौ छोटा है
हम मुसुरमान कट्टर होई खुद आपन नियम बना लेंगे ।।
सिंहन कै शासन खतम हुआ अब देश सियार संभालेंगे ।।

तू करौ घोटाला खूब गुरू रिस्‍तेदारन का भी बाँटौ
मूडे पै हाँथ सोनिया कै, यनका काटौ वनका काटौ
यैं का करिहैं ज्‍यादा से ज्‍यादा पद से इस्‍तीफा लेंगे ।।
सिंहन कै शासन खतम हुआ अब देश सियार संभालेंगे ।।

गलती से पाकिस्‍तान गवा तेईस साल कै जेल भवा
उ मारि काटि कै भेजि दिहिस, ई मेहमानी कै चलन नवा
काहें मार् यौ सनउल…

तुम ही कहो मनमीत मैं क्‍या गीत गाऊँ ।।

तुम ही कहो मनमीत मैं क्‍या गीत गाऊँ
किस बात पे हँसूं कहाँ आँसू बहाऊँ ।।

वेदों से उपजी हिन्‍दु संस्‍कृति नित्‍य नयी 
इसके आगे उपराम हुईं सभ्‍यता कई
इसने जीना सिखलाया पशु से पृथक किया
सद्भाव सिखाकर सबके अवगुण दूर किया
कितनी तरह इतिहास का उपक्रम सुनाऊँ ।।
तुम ही कहो मनमीत मैं क्‍या गीत गाऊँ ।।

कितने शताब्‍द धर्म का शासन रहा
भगवान् भी इन्‍सान बन आया यहाँ
सोने की चिडिया हिन्‍द कहलाने लगा
यह देखकर अरियों के मन लालच जगा
मंशा बनी इस स्‍वर्ण खग को नोच खाऊँ ।।
तुम ही कहो मनमीत मैं क्‍या गीत गाऊँ ।।

फिर हो गई शुरुआत अत्‍याचार की
शक-हूण-मुगल-फिरंग के तलवार की
अन्‍यायियों के हर तरफ विस्‍तार की
अबला बनी माँ भारती चीत्‍कार की
अपनी विपति ले आज किसके द्वार जाऊँ ।।
तुम ही कहो मनमीत मैं क्‍या गीत गाऊँ ।।

आतंक का साम्राज्‍य जब बढने लगा
भारतसुतों में शौर्य का अंकुर उगा
हिन्‍दू-मुसलमाँ हाँथ में तलवार ले
कंधा मिला जय हिन्‍द की हुँकार ले
यह प्रण लिया अरि सामने न सिर झुकाऊँ ।।
तुम ही कहो मनमीत मैं क्‍या गीत गाऊँ ।।

भारत महासंग्राम हम मिलकर लडे हैं
पर आज कुछ मतभेद वैचारिक खडे हैं
हैं याद मंगल भगत तात्‍या चन्‍द्रशेखर
लक्ष्‍मी शिवा राणा सु…

हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।

यह सत्य-सनातन-धर्म-रीति, वैखरी-वाक् वर्णनातीत विधि के हाँथों में पली-बढ़ी, विस्तारित इसकी राजनीति इसके ही पूर्वज सूर्य-चन्द्र-नक्षत्र-लोक-पृथ्वीमाता इसकी रक्षा हित बार-बार नारायण नर बन कर आता कितना उज्ज्वल इतिहास तुम्हारा बात न यह बिसराओ ।। हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।
हिन्दू समाज ने गुरु बनकर फैलाया जग में उजियारा निष्‍कारण किया न रक्तपात पर दुश्‍मन दौड़ाकर मारा मानव को पशु से अलग बना इसने मर्यादा में ढाला इतिहास गढ़ा सुन्दर,रच डाली पावन वेद-ग्रन्थमाला पाणिनि बनकर व्याकरण दिया,चाणक्यनीति भी समझाया बन कालिदास,भवभूति,भास साहित्य-मूल्य भी बतलाया जीवन के उच्चादर्शों का अब फिर से ज्ञान कराओ ।। हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।
हिन्दू ने इस समाज को जाने कितने सुन्दर रत्न दिये पर हा ! कृतघ्न संसार ! नष्‍ट हो हिन्दू सतत प्रयत्न किये मासूम रहा हिन्दू समाज कसते इन छद्म शिकंजों से कर सका नहीं अपनी रक्षा घर में बैठे जयचन्दों से हिन्दू ने जब हिन्दू के ही घर को तोड़ा भ्रम में आकर मुगलांग्लों ने सत्ता छीनी हमको आपस में लड़वाकर घर के भेदी इन जयचन्दों को अब यमपुर पहुँचाओ ।। हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ ।।
काँपती धरा-दिग्पाल-गगन जब हिन्…