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श्री राम के देश में राम के जन्मस्थान पर राजनीति



आज कल श्री राम जन्मभूमि मुद्दा फिरसे छिड़ गया है
कोर्ट में बयानबाजी से लेकर चौराहों और गलियों में भी लोग जहाँ तहां खड़े होकर अपने अपने मंतब्य दे रहे हैं
कुछ की नजर में मंदिर का निर्माण होना चाहिए तो कुछ का अपना अलग ही राग है कि जिस मंदिर के बनाने से लाखो लोग आपस में लड़ जाएँ ऐसा  मंदिर ना ही बने तो ठीक है...
कुछ का तो यहाँ तक कहना है कि वहां पर फिर से बाबरी मस्जिद का निर्माण करा देना चाहिए
और कुछ इसका निदान करते हैं कि मंदिर तो बने साथ ही बगल में मस्जिद का निर्माण हो जाए
पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष  माननीय श्री गडकरी महोदय ने भी इसी बात का ऐलान किया था


मै इस सन्दर्भ में जो भी कहने जा रहा हूँ उसे भले ही आप मेरी सांप्रदायिक भावना कहें या कट्टरवादिता पर
जरा सोचिये भगवान राम जो भारतीयों के प्राण हैं, उन्ही की जन्मभूमि पर उन्ही के जन्मस्थान पर उनका मंदिर नहीं बन पा रहा
ये तो वही बात हो गई कि कोई आप को आपकी ही जमीन से बेदखल कर दे

दूसरी बात - बाबर एक आक्रमणकारी  था जो भारत का भला करने के इरादे से तो नहीं ही आया था ये तो हम सभी को पता है
हमारा इतिहास उसे उन आक्रान्ताओं में गिनता है जिन्होंने भारत को बहुत ही नुक्सान पहुचाया
अब उसके नाम का मस्जिद बनवाने कि मांग करना क्या आपको उचित प्रतीत होता है
ये तो वही बात हो गई जैसे कोई व्यभिचारिणी कुलटा स्त्री परपुरुष के व्यभिचार से उत्पन्न हुए पुत्र को भी अपने पति कि संपत्ति में हिस्सा दिलाने कि जिद करे और ना मानने पर अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात करे

अगर बाबर के नाम का स्मारक गिर भी गया तो क्या

अगर भारत के माथे का एक कलंक धुल गया तो हानि ही  क्या है
इस बात पर अगर मुस्लिम समुदाय ये सोच रहा है कि हिन्दू समाज और  मै उनका विरोधी हूँ तो ये कतई गलत होगा
क्यूंकि भारत में जितने मस्जिद और मकबरे  हैं उतने किसी मुस्लिम देश में भी नहीं, इतना ही नहीं उन स्थानों पर केवल मुस्लिम ही नहीं अपितु  हिन्दू समाज भी उतनी ही  श्रद्धा से सर झुकाते हैं, सजदा करते हैं
जब हम हर जगह हमेशा एक बनकर रहे हैं तो फिर इसी जगह पर झगडा क्यूँ 
हम सब ने आजादी कि लड़ाई साथ साथ लड़ी उस समय तो हम हिन्दू और मुस्लिम नहीं थे
तो आज क्यूँ ?
हमारे मुसलमान भाइयों को ये बात समझ लेनी चाहिए कि किसी आक्रमणकारी के नाम पर जन्मभूमि स्थान पर तो क्या पूरे भारत में कहीं कोई स्मारक स्वीकार्य नहीं होगा
फिर इस बात पर अगर हम सांप्रदायिक कहे जाएँ तो भी कोई गम नहीं


आशा है हम सभी भारतीय इस बात पर एकजुट होंगे
यहाँ मैंने हिन्दू या मुस्लिम नहीं कहा वरन भारतीय कहा 
मतलब जो भी खुद को भारतीय कहता या समझता है उसे भारत में किसी भी विदेशी आक्रमणकारी के नाम पर कोई भी स्मारक स्वीकार्य नहीं होगा


अब रही श्री राम जन्मभूमि की बात तो जो श्री राम सम्पूर्ण चराचर के नियंता हैं, जिनकी इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता उनकी जन्मभूमि पर उनका मंदिर जब वो चाहेंगे बन ही जाएगा


जय श्री राम 


वन्दे मातरं

टिप्पणियाँ

  1. मंदिर तो हर हाल मे बनेगा.जिसकी औकात हो रोक के दिखाये.
    ये हिंदुस्तान जो सिर्फ और सिर्फ हिँदुओ का देश था.
    वहाँ पहले दूसरे देशो से आकर मुसलमान बसे.
    जबरन यहाँ के मंदिर तोड़ कर मस्जिदे बनायी.
    फिर दंगा फसाद करके पाकिस्तान बनवा लिया. जिसका की उन्हे कोई हक ही नही था.
    पाकिस्तान बनने के बाद भी इन लोगो का तमाशा जारी है.
    यहाँ भी हाथो मे चूड़िया नही पहन रखी .
    जिसको मस्जिद बनबानी हो वो पाकिस्तान जाये.
    इन लोगो ने
    पूरा हिँदुस्तान बर्बाद कर के रख दिया हैँ.
    जहाँ देखो वहाँ बूचड़खाने खोल के धर दिये.
    पशुओ को निर्ममता पूर्वक मारकर उनकी खाल से चमड़ा बनाते है.
    और सारी गंदगी गंगा मे बहाकर सारी गंगा प्रदूषित कर दी.
    हिँदूस्तान साला कही से हिँदुस्तान लगता ही नही.
    और ये कुत्ते नेता धर्मनिरपेक्षता निभा रहे हैँ

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