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August, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्रद्धांजलि-द्वितीय भाग

कांग्रेच्युलेशन विक्रम ! यू हैव कम्प्लीटेड योर प्रोवेशन पीरियड वेल । और, तुम्हारे साथ-साथ इस मोहनपुर शाखा के लिये भी गर्व की बात है कि प्रोवेशन टाइम में भी तुम्हारे परिश्रम के कारण जोनल मैनेजर साहब ने तुम्हें प्रशस्ति पत्र दिया है । ऑफ कोर्स, यू हैव वेल डन । तुम्हारा भविष्‍य उज्ज्वल हो । हमारी हार्दिक शुभकामनायें तुम्हारे साथ हैं । ये है तुम्हारा प्रशस्ति पत्र और ये रहा तुम्हारा स्थानान्तरण पत्र । आनन्दनगर शाखा अपने नये व तेज तर्रार शाखा प्रबन्धक की राह देख रही है । ईश्वर करे , तुम और नये कीर्तिमान स्थापित करो । आज मोहनपुर शाखा सूनी हो जायगी ..'' कहते कहते वरि. शाखा प्रबन्धक (मोहनपुर शाखा) श्री विकास चक्रवर्ति जी भावुक हो उठे । विक्रम ने साभार दृष्‍टि के साथ उनके चरण छुये और आशीर्वाद लेकर अपनी नई मंजिल हेतु चल पड़ा । विक्रम एम.ए. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर अगले ही वर्ष बैंक ऑफ बड़ौदा मे अधिकारी (पी.ओ.) के पद पर नियुक्त हो गया था । पदग्रहण हेतु उसे मोहनपुर शाखा पर जाना था जहाँ उसे भेजने के समय विहारी ने उसे उसकी माँ की अन्तिम इच्छा पूर्ण करने हेतु धन्यवाद दिया था और …

श्रद्धांजलि - कवि आर्त कृत लघुकथा ।

बहुत दिन हो गये महाकवि वचन पर कोई काव्‍य या कथा आदि प्रस्‍तुत नहीं कर पाया । अत: आज आपलोगों को कवि 'आर्त' कृत एक बडी ही रोचक कथा सुनाता हूँ । ये कहानी थोडी सी लम्‍बी है अत: इसे कुछ खण्‍डों में क्रम से प्रस्‍तुत करूँगा । आज इस कहानी का पहला चरण प्रस्‍तुत कर रहा हूँ । आशा है आपको यह कहानी पसंद आयेगी । कहानी का शीर्षक है श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि

बिहारी भार्गव ग्रामीण बैंक में चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी था । दस वर्षो के निष्ठा व इमानदारीपूर्ण सेवा के उपरान्त उसे दफ्तरी बना दिया गया था । बिहारी के लिये अपने इकलौते पुत्र विक्रम की शिक्षा व पत्नी साधना की बीमारी के अतिरिक्त इस पृथ्वी पर चिन्ता का और कोई विषय न था । अपने पिता की मृत्यु के दुःखद क्षण वह कब का भुला चुका था । मात्र कक्षा 5 तक पढने के बाद गरीबी व पिता की मृत्यु के कारण उसे अल्पवय में ही शहर जाना पड गया था । बिहारी को अपने पिता की वह बात निरन्तर प्रेरणा मन्त्र की तरह याद रहती - ''बेटा बिहारी ! मैं तुम्हें मझधार में छोडने को मजबूर हूँ । क्या करूँ, कई बार मुझे हृदय की असह्य पीडा का अनुभव है किन्तु आज लगता है, ये मे…

भगवान श्रीराम पर प्रश्‍नचिन्‍ह लगाने वालों क्‍या तुम्‍हे अपनी पैदाइशी का पूरा यकीं है ।

आजकल फिर से ब्‍लाग जगत पर श्रीरामजन्‍म भूमि की कवायद शुरू हो गई है ।
कुछ बदतमीज तरह के लोग हैं जो इसी की आड में फिर से एक बार अशान्ति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं ।
मैं नहीं जानता हूँ कि इस तरह की टिप्‍पणियाँ और लेखों से इनको क्‍या मिल जाता है किन्‍तु इतना जरूर है कि ये अपनी मानसिक पथभ्रष्‍टता जरूर दिखा देते हैं ।
इनमें कुछ वाचालों का प्रश्‍न अब भगवान श्री रामचन्‍द्र के जन्‍म से सम्‍बन्धित है ।
इनको अब ये जानना है कि राम का जन्‍म कहाँ, कब और कितने बज कर कितने मिनट पर हुआ था ।
कारण कि बाबर का जन्‍मदिन इन्होनें पढ रखा है ।
मतलब ये हुआ कि अगर भगवान राम का जन्‍मदिन नहीं पता है और बाबर का जन्‍मदिन पता है तो बाबर भगवान राम से महान हो गया और उसके द्वारा गिराये गये भगवान राम के मंदिर कोई गलत नहीं हैं, बल्कि उसने ठीक ही किया ।
अब इन बुद्धिहीनों से कोई ये पूँछे कि क्‍या आपको अपने धर्म के देवता या फरिस्‍ते के जन्‍म का ठीक-ठीक पता है ।
अगर पता है तो जरा बताएँ कि वो कब, किस दिन , किस जगह और कितने बजकर कितने मिनट पर पैदा हुए थे ।

भगवान श्रीराम पर प्रश्‍नचिन्‍ह लगाने वाले ये वाचाल जरा ये बताएँ कि क…

सावन का महीना है तो एक कजली हो जाए ।

भइया सावन का महीना चल रहा है और अगर आप देहात से सम्‍बन्‍धित हैं तो आपको पता ही होगा कि इस समय लोकगी‍तों में सबसे ज्‍यादा कजली गाई जाती है ।
अजीब बात ये है कि अगर आप इसके अभ्‍यासी हैं तो जैसे ही बरसात की बूँदें गिरनी शुरू होंगी वैसे ही आपको कजली गाने या सुनने का मन होने लगेगा ।
आज ठीक यही बात मेरे साथ हुई । आज जब पानी बरसने लगा तो मुझे भी कजली सुनने का बडा मन होने लगा । उस समय मैं अपने मामा जी के घर पर था और मेरी मामी जी बहुत ही सुन्‍दर गाती हैं , सो हमने तो आज का भरपूर मजा उठाया । सोचा कि क्यूँ न आपको भी ये मजा आस्‍वादन कराया जाए ।
कवि 'आर्त' कृत कजली प्रस्‍तुत कर रहा हूँ, धुन आप अपने मन में ही बजा लीजियेगा ।

हरे रामा चले ललकि कपि वीर लंक ललकारी रे हारी

मुखहि मेलि मुद्रिका मुदित मन मारूति मंगलकारी रामा
हरे रामा पहुँचे पयोनिधि पार प्रबल प्रणधारी रे हारी ।।

चढि कंगूर वीथिन वन खोजत विकल वज्र वपुधारी रामा
हरे रामा भेंटि विभीषण भक्‍त भयो सुख भारी रे हारी ।।

सुनि संकेत सकेलि खोजि सिय संकुल सुख संचारी रामा
हरे रामा निरखि निपट नि:शंक न‍वहि निसिचारी रे हारी ।।


सुत संग सिय सनमानि 'आर…